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ब्लू चिप स्टॉक क्या हैं?(what is bluechip stocks)

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ब्लू चिप स्टॉक क्या हैं? शेयर मार्केट में चुनी गई सबसे बेहतर कंपनियों को ब्लू चिप कंपनी कहते है । ये मार्किट की सबसे विश्वशनीय और अधिक ट्रेड की जाने वाली कंपनिया होती है । ब्लू चिप कम्पनियाँ फ़ाइनेंशियल रूप से काफी मजबूत होती है जिससे मार्किट में होने वाले उतार - चढ़ाव से इन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है । जैसे : Reliance , Infosys , HDFC , SBI , TATA , ये सभी स्टॉक एक्सचेंज पर चुनी गई ब्लू चिप कंपनियां है । अब आप यहाँ ब्लू चिप कंपनी को कैसे ढूंढेगे तो इसमें निफ्टी और सेंसेक्स में शामिल सभी कम्पनियाँ ब्लू चिप कम्पनी होती है । यही नहीं इसमें वह कपनियां भी शामिल होती है जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन ज्यादा होने के साथ - साथ प्रॉफिट और सेल्स भी लगातार बढ़ रही होती है । और पिछले कुछ सालों में अपने इन्वेस्टर्स को अच्छा लाभ कमा कर दे रही हो आप उन कंपनियों को एक ब्लू चिप कंपनी मान सकते है । ब्लू चिप कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन बहुत बड़ा होता है इसलिए यह कंपनी अपने ट्रेड और इंडस्ट्री में लीडर होती है । आइए जानें , कि इस प्रकार के शेयरों से आप कितने रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं खरीद...

what is mutual fund म्यूच्यूअल फंड क्या है?

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म्यूच्यूअल फंड क्या है? ज़्यादातर लोगों को म्यूच्यूअल फंड्स पेचीदे और डरावने लग सकते हैं| हम आपके लिए बिलकुल बुनियादी स्तर पर इसे सरल और स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे| दरअसल, बहुत सारे निवेशकों की धनराशि जमा होने पर ही म्यूच्यूअल फंड की सृष्टि होती है| इस फंड के प्रबंधन के लिए फंड प्रबंधक नियुक्त होते हैं| ये एक ऐसा ट्रस्ट है जो बड़ी संख्या में ऐसे निवेशकों की धनराशि एकत्रित करता है, जिन निवेशकों का एक उभय निष्ठ/एकसा उद्देश्य है| तत्पश्चात, विभिन्न विकल्पों जैसे इक्विटी, बांड, मुद्रा बाज़ार के साधनों, और/अथवा अन्य सिक्योरिटीज में ये राशि निवेश करती है| हर निवेशक इकाइओं का मालिक होता है जो फंड के मल्कियत के एक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं| इस सामूहिक निवेश से जो आमदनी /लाभ उत्पन्न होता है, उसे सही अनुपात में निवेशकों में वितरित कर दिया जाता है, स्कीम के ‘नेट एसेट वैल्यू’ या NAV की गणना के पश्चात कुछ व्यय उस राशि में से घटा भी लिए जाते हैं| सीधे शब्दों में गर कहें, एक आम आदमी के लिए म्यूच्यूअल फंड सबसे साध्य विकल्प है जो उसे विभिन्न प्रकार के, व्यावसायिक द्वारा प्रबंधित सिक्यो...

क्या होता है ईटीएफ? (what is ETF?)

ईटीएफ (ETF)क्या है? ईटीएफ या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड शेयरों के एक सेट में निवेश करते हैं. ये अमूमन एक खास इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. ईटीएफ म्यूचुअल फंड जैसे होते हैं. लेकिन, दोनों में बड़ा अंतर यह है कि ईटीएफ को केवल स्टॉक एक्सचेंज से खरीदा या बेचा जा सकता है. जिस तरह आप शेयरों को खरीदते हैं. ठीक वैसे ही आप एक्सचेंज के कारोबारी घंटों के दौरान ईटीएफ को भी खरीद सकते हैं. इंडेक्‍स फंडों की तरह ईटीएफ अमूमन किसी खास मार्केट इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. इनका प्रदर्शन उस इंडेक्‍स जैसा होता है. यह इंडेक्स निफ्टी ईटीएफ जैसा शेयर मार्केट इंडेक्‍स हो सकता है या गोल्‍ड ईटीएफ जैसा कमोडिटी इंडेक्स या बॉन्‍ड ईटीएफ के तौर पर बॉन्‍ड मार्केट. एसेट मैनेजमेंट कंपनी ईटीएफ लॉन्‍च करती हैं. इन्‍हें किसी अन्‍य म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम की तरह ही पेश किया जाता है. ईटीएफ में निवेश के लिए डीमैट के साथ ट्रेडिंग अकाउंट का होना जरूरी है. कोई व्यक्ति 3-इन-1 अकाउंट खोलने का भी विकल्प चुन सकता है. इसमें बैंक अकाउंट के साथ डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट की सुविधा मिलती है. इस तरह आप ज्यादा कुशलता के साथ एक ही जगह अपने निवेश को ...

क्या होता है FNOफ्यूचर एंड ऑप्शन? (what is future and option)

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शेयर  मार्केट में वायदा और विकल्प (FNO) क्या है By ADARSH KUMAR PASWAN | Published on 6th MARCH 2022| नीचे दिए गए  यूट्यूब वीडियो  के माध्यम से आप ज्यादा अच्छे से  फ्यूचर एंड ऑप्शन को समझ सकते हैं। जिस प्रकार हम अलग अलग वित्तीय उपकरणों जैसे बॉन्ड, शेयर, डिबेंचर्स आदि में निवेश करते हैं, उसी प्रकार डेरिवेटिव में भी निवेश किया जाता है। शेयर बाज़ार में होने वाली फ्यूचर एवं ऑप्शन ट्रेडिंग (Futures and Options in Hindi) ऐसा ही निवेश है। चलिए इसे एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए आपके घर के आसपास एक प्रॉपर्टी खाली है और आपको लगता है कि 6 महीने बाद उस प्रॉपर्टी के पास से हाईवे जाने वाली है जिस कारण उस प्रॉपर्टी के दाम कई गुना हो सकते हैं तो आप उस प्रॉपर्टी को खरीदना चाहेंगे लेकिन आप हंड्रेड परसेंट श्योर नहीं है की उस प्रॉपर्टी के पास से हाईवे जाएगा या नहीं इसीलिए ऐसे में ऑप्शन काम आता है आप प्रॉपर्टी विक्रेता से एक ऑप्शन बाय कर सकते हैं जिसका प्रीमियम प्रॉपर्टी की कीमत से बहुत ही कम हो सकता है जैसे कि ₹50000 का टोकन अमाउंट आप पे करके प्रॉपर्टी विक्रेता से कह सकते...

शेयर बाजार में डेरिवेटिव का क्या अर्थ होता है?

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क्या है डेरिवेटिव बाजार, यह कैसे काम करता है? कई बार आपका सामना फ्यूचर्स, ऑप्शंस और ऑप्शन जैसे शब्दों से हुआ होगा. क्या आप इनका मतलब जानते हैं? आपने शेयरों के डेरिवेटिव सौदों के बारे में जरूर सुना होगा. इसी तरह कई बार आपका सामना फ्यूचर्स, ऑप्शंस और ऑप्शन जैसे शब्दों से हुआ होगा. क्या आप इनका मतलब जानते हैं? हम आपको इस बारे में बता रहे हैं.  बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) क्या है? उत्तर:  इक्विटी बाजार में दो सेगमेंट (हिस्से) होते हैं. इसमें एक है कैश यानी नकद सेगमेंट और दूसरा है डेरिवेटिव सेगमेंट. इसे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस भी कहा जाता है. प्रश्न: क्या एफएंडओ सेगमेंट के डेरिवेटिव की वैल्यू कैश सेगमेंट से निकाली जाती है? उत्तर:  जैसा नाम से जाहिर है डेरिवेटिव सेगमेंट की वैल्यू अंडरलायर के तहत निकाली जाती है. मौजूदा समय में निफ्टी 50 इंडेक्स और सेंसेक्स, बैंक निफ्टी और कैश सेगमेंट के चुनिंदा शेयर अंडरलायर की भूमिका अदा करते हैं. प्रश्न: इसका मतलब है कि निफ्टी के पास निफ्टी फ्यूचर्स सौदे हैं और बैंक निफ्टी के पास भी इसी तरह के एफएंडओ सौदे होंगे? उत्तर: ...

what is dividend?(डिविडेंड क्या होता है?)

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डिविडेंड(Dividend) क्या होता है? कंपनी को एक साल में जो मुनाफा होता है उसको शेयरधारकों में बाँटा जाता है और इसे ही डिविडेंड कहते हैं। कंपनी अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देती हैं। डिविडेंड प्रति शेयर के आधार पर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 2012-13 में इन्फोसिस ने हर शेयर पर 42 रुपये का डिविडेंड दिया था। डिविडेंड को शेयर के फेस वैल्यू के प्रतिशत के तौर पर भी देखा जाता है। जैसे इन्फोसिस के उदाहरण में शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये थी और डिविडेंड 42 रुपये, यानी कंपनी ने 840% का डिविडेंड दिया हर साल डिविडेंड देना कंपनी के लिए ज़रूरी नहीं होता। अगर कंपनी को लगता है कि साल का मुनाफा डिविडेंड के रूप में बाँटने की जगह उस पैसे का इस्तेमाल नए प्रॉजेक्ट और बेहतर भविष्य के लिए करना चाहिए तो कंपनी ऐसा कर सकती है। डिविडेंड हमेशा मुनाफे में से ही नहीं दिया जाता। कई बार कंपनी को मुनाफा नहीं होता लेकिन उसके पास काफी नकद पड़ा होता है। ऐसी स्थिति में कंपनी उस नकद में से भी डिविडेंड दे सकती है।  कभी कभी डिविडेंड देना कंपनी के लिए सबसे सही कदम होता है। जब कंपनी के पास कारोबार के विस्तार का कोई ...

कॉन्टैक्टलेस डेबिट कार्ड (contactless ATM card)

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 ATM कार्ड में न पिन डालना होता है, न ही ओटीपी आता है, कार्ड को मशीन से टच करते ही हो जाता है पेमेंट, एक्सपर्ट बोले यही है खतरा 3 वर्ष पहले  राहुल जी अपने  परिवार के साथ फिल्म देखने गए थे। टिकट खरीदने के लिए उन्होंने अपना डेबिट कार्ड दिया। काउंटर पर मौजूद एक्जीक्यूटिव ने 1500 रुपए पेमेंट लेकर कार्ड उन्हें लौटा दिया। जब राहुल ने पूछा कि मैंने पिन तो डाला ही नहीं तो पेमेंट कैसे हो गया तो एक्जीक्यूटिव ने बताया कि आपका कार्ड कॉन्टैक्टलेस है। इससे 2000 रुपए तक की शॉपिंग के लिए पिन की जरूरत नहीं होती। कार्ड को मशीन के पास ले जाने पर ही पेमेंट हो जाता है। जितेंद्र की ही तरह इन दिनों कई ग्राहकों के पास कॉन्टैक्टलेस पेमेंट फीचर वाले कार्ड पहुंच रहे हैं। 1 जनवरी 2019 से विभिन्न बैंकों के अधिकांश कार्ड ऐसे ही आ रहे हैं। नए कॉन्टैक्टलेस डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। इसकी वजह यह है कि मॉल या दुकानों में इनके जरिए एक बार में दो हजार रुपए तक की शॉपिंग के लिए किसी भी तरह के पिन कोड या ओटीपी की जरूरत नहीं होती। बस कार्ड को पेमेंट मशीन...